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बुधवार, 1 अप्रैल, 2026 तक, मध्य पूर्व को हिला देने वाला संघर्ष—'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी'—अपने निर्णायक और अनिश्चित मोड़ पर पहुँच गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका अपने सैन्य लक्ष्यों में "दो हफ्ते आगे" चल रहा है और महज दो से तीन हफ्तों में ईरान से अपनी सेना वापस बुला सकता है।
युद्ध अब अपने पांचवें हफ्ते में है। "दो-हफ्ते की वापसी" की यह बात सैन्य सफलता, अमेरिकी घरेलू ऊर्जा संकट और एक जटिल 15-सूत्रीय शांति योजना के बीच कही जा रही है।
ट्रंप प्रशासन द्वारा प्रस्तावित इस समझौते में कई महत्वपूर्ण शर्तें शामिल हैं:
यूरेनियम का आत्मसमर्पण: ईरान को अपना पूरा समृद्ध यूरेनियम भंडार अंतरराष्ट्रीय निगरानी में सौंपना होगा।
एक महीने का युद्धविराम: क्षेत्र को स्थिर करने के लिए एक महीने का अनिवार्य सीजफायर।
मिसाइल प्रतिबंध: तेहरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर स्थायी सीमा और क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों (जैसे हिजबुल्लाह) को फंडिंग बंद करना।
ईरान की मांग: ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालबाफ ने संप्रभुता की मान्यता और युद्ध के नुकसान की भरपाई (Reparations) की मांग की है।
28 मार्च, 2026 को एक बड़ी कामयाबी मिली जब ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से कृषि और चिकित्सा शिपमेंट को गुजरने देने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) के अनुरोध को स्वीकार कर लिया।
निगरानी: जहाजों का निरीक्षण ओमान में किया जा रहा है ताकि हथियारों की तस्करी रोकी जा सके।
तेल का संकट: सहायता तो पहुँच रही है, लेकिन तेल और गैस के टैंकरों पर अभी भी पाबंदी है, जिससे अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें $4 प्रति गैलन के पार बनी हुई हैं।
जहाँ वाशिंगटन वापसी की बात कर रहा है, वहीं इजरायल अपने सुरक्षा लक्ष्यों पर कायम है।
सुरक्षा क्षेत्र: इजरायली रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने कहा कि भले ही अमेरिकी ऑपरेशन खत्म हो जाए, इजरायल दक्षिणी लेबनान में लिटानी नदी तक अपना "सुरक्षा क्षेत्र" बनाए रखेगा।
स्रोत / संदर्भ: व्हाइट हाउस प्रेस ब्रीफिंग, JINSA ऑपरेशन अपडेट (31 मार्च, 2026), और द हिंदू इंटरनेशनल की रिपोर्ट पर आधारित। https://www.whitehouse.gov/
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