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"₹5.2 करोड़ का हेयरकट" मुआवजे की अपील: 2026 में उपभोक्ता अधिकारों के लिए एक ऐतिहासिक फैसला

एक हथौड़ा (Gavel) और कैंची, जो ITC मौर्या हेयरकट मुआवजे के मामले में कानूनी लड़ाई का प्रतीक है।

मार्च 2026 में, भारत के सबसे चर्चित उपभोक्ता अधिकार मामलों में से एक—"₹5.2 करोड़ का हेयरकट" विवाद—भारत के सुप्रीम कोर्ट में अपने अंतिम निष्कर्ष पर पहुँच गया है। यह मामला 2018 में शुरू हुआ था जब मॉडल आशना रॉय ने नई दिल्ली के ITC मौर्या होटल के खिलाफ गलत हेयरकट और बालों के खराब उपचार के लिए मुकदमा किया था। 2026 में यह मामला सेवा उद्योगों में "अमूर्त हानि" (Intangible Loss) के मूल्यांकन के लिए एक वैश्विक उदाहरण बन गया है।

केस की समयरेखा और वर्तमान स्थिति:

  • घटना (2018): आशना रॉय ने साधारण हेयरकट मांगा था, लेकिन आरोप है कि उन्हें बहुत छोटे बाल और एक रासायनिक उपचार दिया गया जिससे उनके स्कैल्प (सिर की त्वचा) को नुकसान पहुँचा।

  • NCDRC का पहला फैसला (2021): राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने मॉडल के करियर के नुकसान का हवाला देते हुए ₹2 करोड़ के रिकॉर्ड मुआवजे का आदेश दिया।

  • सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप (2023): सुप्रीम कोर्ट ने ₹2 करोड़ के आदेश को रद्द कर दिया और NCDRC से नुकसान के वास्तविक सबूतों के आधार पर मुआवजे का पुनर्मूल्यांकन करने को कहा।

  • अंतिम अपील (मार्च 2026): मुआवजे की राशि के खिलाफ ITC मौर्या की अंतिम अपील पर सुनवाई पूरी हुई।


2026 का फैसला: क्यों चर्चा में है यह राशि?

हालांकि शिकायतकर्ता का प्रारंभिक दावा ₹3 करोड़ से अधिक का था, लेकिन 2026 में कानूनी बहस भावनात्मक संकट और स्कैल्प को हुए स्थायी नुकसान पर केंद्रित रही।

  • कोर्ट का रुख: सुप्रीम कोर्ट ने जोर देकर कहा कि यदि किसी पेशेवर की आजीविका उसके शारीरिक स्वरूप पर निर्भर करती है, तो लापरवाही के कारण उस स्वरूप के खराब होने पर वह भारी मुआवजे का हकदार है।

  • अंतिम समझौता: अदालत ने अंततः ₹1.8 करोड़ प्लस ब्याज के मुआवजे के पैकेज को बरकरार रखा, जो 8 वर्षों के कानूनी खर्च और ब्याज के साथ मिलकर लगभग ₹2.5 - 3 करोड़ के करीब पहुँच जाता है।


सैलून और हॉस्पिटैलिटी उद्योग पर प्रभाव

इस मामले ने भारतीय सैलून उद्योग में बड़े बदलाव किए हैं। 2026 में, अब अधिकांश हाई-एंड सैलून के लिए ये अनिवार्य हैं:

  1. डिजिटल सहमति फॉर्म: रासायनिक उपचारों के जोखिमों को समझाने वाले फॉर्म।

  2. CCTV दस्तावेजीकरण: स्टाइलिस्ट और क्लाइंट के बीच हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग।

  3. प्रोफेशनल लायबिलिटी इंश्योरेंस: "सेवा में लापरवाही" के दावों को कवर करने के लिए बीमा।

आधिकारिक केस संसाधन (Official Case Resources):

स्रोत / संदर्भ:

LiveLaw 2026 अपडेट, सुप्रीम कोर्ट केस स्टेटस, और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की ब्रीफिंग पर आधारित। https://consumeraffairs.nic.in/


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