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महाराष्ट्र के ठाणे, बदलापुर और नासिक में मानव अंडाणुओं (Eggs) के अवैध निष्कर्षण और बिक्री से जुड़े एक चौंकाने वाले रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। यह रैकेट गरीब महिलाओं को ₹25,000 से ₹30,000 का लालच देकर उनका शारीरिक शोषण कर रहा था और उन्हें खतरनाक चिकित्सा प्रक्रियाओं से गुजरने के लिए मजबूर कर रहा था।
केस के मुख्य विवरण (20 मार्च, 2026 तक):
कार्रवाई: फरवरी 2026 के अंत में ठाणे के बदलापुर और उल्हासनगर में छापेमारी के बाद तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया गया।
मुख्य आरोपी: 4 मार्च, 2026 को पुलिस ने नासिक के मालती IVF सेंटर के निदेशक डॉ. अमोल पाटिल को गिरफ्तार किया, जिसे इस घोटाले का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। उनकी पत्नी डॉ. वंदना पाटिल फिलहाल फरार हैं।
काम करने का तरीका: एजेंट महिलाओं को हार्मोनल इंजेक्शन देकर घरों में ही उनके अंडाणुओं के उत्पादन को उत्तेजित करते थे। इसके बाद, उन्हें अनाधिकृत सेंटर्स पर ले जाकर सर्जरी के जरिए अंडाणु निकाल लिए जाते थे और लाखों रुपये में बेचे जाते थे।
कानूनी उल्लंघन: सरोगेसी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 के तहत एक महिला जीवन में केवल एक बार ही अंडाणु दान कर सकती है। लेकिन, जांच में ऐसी महिलाएं मिलीं जिनसे फर्जी आधार कार्ड का उपयोग करके 8 से 10 बार अंडाणु निकाले गए थे।
यह मामला महाराष्ट्र विधान परिषद में भी गूँजा, जहाँ मंत्री योगेश कदम ने इसे "अत्यधिक गंभीर" बताया।
लाइसेंस रद्द: विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोऱ्हे ने इंडियन मेडिकल काउंसिल को आरोपी डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने का निर्देश दिया है।
सेंटर सील: नासिक के मालती IVF सेंटर को सील कर दिया गया है और कई अन्य केंद्र अब पुलिस के रडार पर हैं।
अंतरराज्यीय संबंध: पुलिस को संदेह है कि इस रैकेट के तार तेलंगाना और कर्नाटक से भी जुड़े हुए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिना डॉक्टरी देखरेख के बार-बार हार्मोनल इंजेक्शन लेने से महिलाओं को किडनी फेलियर और स्थायी बांझपन का खतरा हो सकता है। पुलिस ने अब तक लगभग 20 पीड़ितों की पहचान की है।
ठाणे पुलिस ब्रीफिंग, महाराष्ट्र विधान परिषद कार्यवाही (मार्च 2026), और मेडिकल डायलॉग्स हेल्थ न्यूज की रिपोर्ट पर आधारित।
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