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हैदराबाद सिटी पुलिस ने डिजिटल लेंडिंग घोटालों में भारी वृद्धि को देखते हुए "अर्जेंट अलर्ट" जारी किया है। मार्च 2026 में, साइबर अपराध इकाई ने ऐसे मामलों में 40% की वृद्धि दर्ज की है जहाँ पीड़ितों को उनकी मॉर्फ्ड (छेड़छाड़ की गई) तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल किया गया। ये घोटाले सोशल मीडिया पर मिलने वाले "इंस्टेंट" लोन ऐप्स के माध्यम से फैलाए जा रहे हैं।
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साइबर क्राइम विंग (CCW) के अनुसार, ये ऐप्स "बिना किसी दस्तावेज़" और "मिनटों में लोन" के वादे के साथ लोगों को लुभाते हैं। एक बार ऐप इंस्टॉल होने के बाद, यह यूजर के कॉन्टेक्ट्स, गैलरी और लोकेशन तक पहुँचने की अनुमति मांगता है।
कर्ज का जाल: ₹5,000 का लोन दिया जाता है, लेकिन केवल सात दिनों के भीतर ₹10,000 वापस करने को कहा जाता है।
उत्पीड़न: यदि भुगतान में एक घंटे की भी देरी होती है, तो रिकवरी एजेंट पीड़ित की कॉन्टेक्ट लिस्ट में मौजूद सभी लोगों को कॉल करना शुरू कर देते हैं।
डीपफेक का डर: इस सप्ताह दर्ज मामलों में, जालसाजों ने पीड़ितों को सामाजिक रूप से बदनाम करने के लिए AI-जनरेटेड "डीपफेक" तस्वीरों का उपयोग किया।
पुलिस ने नागरिकों से किसी भी लोन विज्ञापन पर क्लिक करने से पहले इन नियमों का पालन करने का आग्रह किया है:
NBFC स्थिति की जांच करें: केवल उन्हीं ऐप्स से उधार लें जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) में पंजीकृत NBFC से जुड़े हों।
APK फाइलों से बचें: व्हाट्सएप लिंक या अज्ञात वेबसाइटों से कभी भी लोन ऐप डाउनलोड न करें।
अनावश्यक परमिशन न दें: किसी भी वैध लोन ऐप को आपकी पूरी कॉन्टेक्ट लिस्ट या निजी फोटो गैलरी की आवश्यकता नहीं होती है।
हैदराबाद पुलिस ने जोर देकर कहा है कि उत्पीड़न एक अपराध है, चाहे कर्ज कितना भी हो। यदि आपको धमकी दी जा रही है:
अतिरिक्त भुगतान न करें: "एक्सटेंशन फीस" देने से जालसाजों का हौसला और बढ़ता है।
तुरंत रिपोर्ट करें: राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
स्थानीय संपर्क: आप हैदराबाद साइबर क्राइम स्टेशन से +91 40 2326 0003 पर संपर्क कर सकते हैं।
हैदराबाद सिटी पुलिस साइबर सेल (मार्च 2026) और RBI डिजिटल लेंडिंग गाइडलाइंस द्वारा जारी आधिकारिक एडवाइजरी। https://www.hyderabadpolice.gov.in/
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