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भारत सरकार ने दोहराया है कि वैश्विक व्यापारिक दबावों और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भी किसानों के हित सर्वोच्च प्राथमिकता बने रहेंगे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कृषि से जुड़ी नीतियां हमेशा किसानों के कल्याण को केंद्र में रखकर बनाई जाएंगी।
पिछले कुछ महीनों में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक संस्थानों और साझेदारों ने भारत से सब्सिडी, निर्यात और खाद्यान्न भंडारण पर अपने रुख में बदलाव करने का दबाव बनाया है। लेकिन सरकार का कहना है कि किसानों को उचित मूल्य, आजीविका की सुरक्षा और देश की खाद्य सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।
एक कृषि नीति बैठक में वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “वैश्विक चुनौतियाँ वास्तविक हैं, लेकिन हम अपने किसानों के भविष्य से समझौता नहीं कर सकते। हर निर्णय में उनका हित सर्वोपरि होना चाहिए।”
सरकार खरीद प्रणाली को मजबूत करने, सिंचाई कवरेज बढ़ाने और टिकाऊ खेती की ओर प्रोत्साहित करने पर भी काम कर रही है। इन कदमों का उद्देश्य बाहरी कारकों पर निर्भरता घटाना और कृषि क्षेत्र को दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं और घरेलू कृषि की रक्षा के बीच भारत का संतुलन भविष्य में उसकी वैश्विक स्थिति तय करेगा।